आज का शब्द है — स्मृति।
स्मृति का अर्थ है याद, वह अनुभव जो समय के साथ मनुष्य के मन में सुरक्षित रहता है। साहित्य में स्मृति का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि बहुत-सी रचनाएँ लेखक की स्मृतियों से जन्म लेती हैं। बचपन की यादें, किसी स्थान की छवि, किसी व्यक्ति का प्रभाव या किसी घटना की छाप—ये सब स्मृति के रूप में लेखक के भीतर जीवित रहते हैं और बाद में रचना का रूप ले लेते हैं।
हिंदी साहित्य में स्मृति का प्रयोग कई कवियों और लेखकों ने किया है। स्मृति केवल अतीत की याद नहीं बल्कि अनुभवों की एक ऐसी धारा है जो वर्तमान को भी प्रभावित करती है। जब कोई पाठक किसी रचना को पढ़ता है और उसमें अपने जीवन की झलक पाता है, तब वह साहित्य की शक्ति और स्मृति की गहराई दोनों को महसूस करता है।
आज के समय में जब जीवन बहुत तेज़ी से बदल रहा है, स्मृति हमें अपने अतीत और अनुभवों से जोड़े रखने का काम करती है। साहित्य इन्हीं स्मृतियों को शब्दों में सुरक्षित रखता है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी उन अनुभवों को समझ सकें।
प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन की एक पंक्ति स्मृति के महत्व को बहुत सुंदर ढंग से व्यक्त करती है—
“जो बीत गई सो बात गई।”
यह पंक्ति बताती है कि स्मृतियाँ जीवन का हिस्सा होती हैं, लेकिन मनुष्य को आगे बढ़ना भी सीखना पड़ता है।
इस प्रकार स्मृति केवल एक शब्द नहीं, बल्कि मनुष्य के अनुभव, भावनाओं और जीवन की कहानी का एक महत्वपूर्ण आधार है।





