हिंदी साहित्य की वरिष्ठ कथाकार, निबंधकार और विचारशील लेखिका ममता कालिया को उनके दीर्घकालीन और बहुआयामी साहित्यिक योगदान के लिए अमर उजाला समूह द्वारा प्रदत्त प्रतिष्ठित ‘आकाशदीप साहित्य सम्मान’ से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। यह सम्मान समकालीन हिंदी साहित्य में उनकी विशिष्ट उपस्थिति, वैचारिक स्पष्टता और सामाजिक संवेदनशीलता का औपचारिक स्वीकार है।
ममता कालिया का लेखन हिंदी साहित्य में उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है जिसने साहित्य को केवल सौंदर्यबोध तक सीमित न रखकर उसे सामाजिक यथार्थ और आत्मानुभव से जोड़ा। उनके कथा-साहित्य में मध्यवर्गीय जीवन की जटिलताएँ, स्त्री की आंतरिक स्वतंत्रता, पारिवारिक संरचनाओं के भीतर छिपे तनाव और बदलते सामाजिक मूल्य गहरी प्रामाणिकता के साथ उभरते हैं।


उन्होंने कहानी, उपन्यास, संस्मरण और निबंध—सभी विधाओं में अपनी सशक्त पहचान बनाई है। उनकी भाषा में जहाँ एक ओर सहजता और संवादधर्मिता है, वहीं दूसरी ओर विचार की दृढ़ता और आत्मालोचनात्मक दृष्टि भी स्पष्ट दिखाई देती है। ममता कालिया का लेखन स्त्री-अनुभव को करुणा या सहानुभूति के सीमित दायरे में न बाँधकर स्वतंत्र व्यक्तित्व और वैचारिक आत्मनिर्भरता के रूप में प्रस्तुत करता है, जो उन्हें समकालीन लेखिकाओं में विशिष्ट बनाता है।
‘आकाशदीप साहित्य सम्मान’ के लिए उनका चयन इस अर्थ में भी महत्वपूर्ण है कि यह सम्मान ऐसे रचनाकारों को दिया जाता है, जिन्होंने साहित्य के माध्यम से समय के प्रश्नों से निरंतर संवाद किया हो और जिनकी रचनाएँ समाज को सोचने, आत्ममंथन करने और प्रश्न उठाने की प्रेरणा देती हों। ममता कालिया का रचनात्मक अवदान इस कसौटी पर पूरी तरह खरा उतरता है।
यह सम्मान केवल एक लेखक की उपलब्धियों का अभिनंदन नहीं है, बल्कि हिंदी साहित्य की उस वैचारिक परंपरा का भी उत्सव है, जिसमें लेखन सामाजिक उत्तरदायित्व, नैतिक साहस और रचनात्मक स्वतंत्रता का माध्यम बनता है। ममता कालिया को दिया गया यह सम्मान आने वाली पीढ़ी के लेखकों और पाठकों—दोनों के लिए यह संदेश देता है कि साहित्य की सार्थकता समय के साथ खड़े होकर सवाल करने में निहित है।






